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Tuesday, September 16, 2008

यह गृहमंत्री नपुंसक है


वाराणसी, मुंबई, बेंगलूर, अजमेर, जयपुर, अहमदाबाद और अब देश की राजधानी दिल्ली। आतंक के शिकार होने वाले शहरों और बेगुनाहों के कत्ल की सूची लंबी होती जा रही है। आतंकी जब चाहे, जहां चाहे आम लोगों को निशाना बनाते जा रहे है और इस देश का नपुंसक गृहमंत्री हर आतंकी वारदात के बाद एक ही रटा रटाया बयान देता है-कानून के अनुसार कड़ी कार्यवाई होगी। आखिर हम कब तक ऐसे नपुंसक शासकों के भरोसे मरते रहेंगे। 10 जनपथ के इन पालतू नेताओं के हाथों क्या देश सुरक्षित है। कत्तई नहीं। इस नपुंसक गृहमंत्री के चार साल के शासन में आज तक कोई ऐसी कार्ययोजना नहीं बनी, जिससे आतंकियों में खौफ पैदा हो सके। हां, फैशन परेड में यह नेता सबसे टाप पर है। रोजाना नए-नए सूट पहनना, जुते बदलना और महंगे इंर्पोटेड परफ्यूम का इस्तेमाल करना इसका पसंदीदा कार्य है। इसे क्यू फिक्र होने लगी इस देश की। इसका जीता-जागता नमूना मिला शनिवार को राजधानी में हो रहे सीरीयल ब्लास्ट के मौके पर, जब शाम 6 बजे के बाद राजधानी में आतंकियों के हमले से दिल्ली थर्रा रहा था और बेकसूर मर रहे थे, मगर हमारे माननीय गृहमंत्री अपने सफारी शूट बदलने में मशगूल थे। वाह रे देश के गृहमंत्री..अरे अब भी कुछ शर्म बचा है तो अपने मंत्रालय जाकर आतंकियों की फाइलें निकलवाओं और मीडिया में बयान न देकर उस पर वास्तविक कार्यवाई करों।

Monday, September 15, 2008

किसके बाप की है मुंबई!


किसके बाप की है मुंबई! राज ठाकरे, उसके ताऊ बाल ठाकरे या वहां की शिखंडी सरकार के मुखिया विलास राव देशमुख या आरआर पाटिल जैसे हिजड़े नेताओं की। इन सब के बीच एक और नाम आता है। मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त [कानून व्यवस्था] के एल प्रसाद का, जो एक बेदाग छवि के आईपीएस जाने जाते है। आखिर ऐसा क्या कह दिया के एल प्रसाद ने जो अपनी बिल में ही भौंकने वाले राज ठाकरे और उसके ताऊ बाल ठाकरे सरीखे चूहों के साथ-साथ महाराष्ट्र के शिखंडी सरकार के उप मुख्यमंत्री आरआर पाटिल को भी चुभने लगी। क्या राज्य में कुख्यात महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की गुण्डागर्दी के खिलाफ के एल प्रसाद को नहीं बोलना चाहिए? क्या उन्हें भी हिजड़े नेताओं की तरह मनसे के गुण्डा प्रमुख राज ठाकरे को खुले साड की तरह छोड़ देना चाहिए। ताकि भाषा और क्षेत्रवाद का आतंक फैला कर ठाकरे खानदान राजनीतिक दुकानदारी चलाता रहे। पूरे देश में आतंकियों पर लगाम लगाने की बात कही जा रही है, फिर महाराष्ट्र के इन कथित आतंकवादियों पर नियंत्रण क्यों नहीं हो रहा है। क्या इस लिए कि आर आर पाटिल जैसे नेता इस राज्य में उप मुख्यमंत्री है और राज ठाकरे जैसे आतंकियों का संरक्षक बन कर बैठे है ताकि अगले चुनाव में भाषा का विष पिला कर कुर्सी से चिपके रह सके। मगर यह बेहद खतरनाक है। शिव सेना प्रमुख अपने अखबार के संपादकीय में लिखते है कि मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त के एल प्रसाद की मुंबई पर की गई टिप्पणी अमर्यादित है। वाह रे बुढ़ऊ ठाकरे..अब आप जैसे जहरीले और उदंड राज नेता के एल प्रसाद जैसे बेदाग अधिकारी को मर्यादा सिखाएंगे। महाराष्ट्र गुण्डा सेना का प्रमुख राज ठाकरे के एल प्रसाद को वर्दी उतार कर बयान देने की चेतावनी देता है और सरकार मौन रह कर आतंकियों को प्रोत्साहित करती है।

Tuesday, September 9, 2008

10 सितंबर, काला बुधवार: बेकार आशंका


लार्ज हेड्रोन कोलिडर [एलएचसी] जी हां, यही नाम है उस मशीन का, जिसके बारे में रोजाना टीवी चैनल वाले लोगों को डरा रहे है। यह जिनेवा स्थित परमाणु शोध प्रयोगशाला सर्न में रखी गई है, और आज 10 सितंबर, यानी बुधवार को यहां दुनियाभर के लगभग 2500 वैज्ञानिक जुटेंगे और धरती के 330 फुट नीचे इस मशीन के जरिए भौतिकी का सबसे बड़ा प्रयोग करेंगे।चौदह साल के लंबे इंतजार के बाद पृथ्वी की अनेक गुत्थियां सुलझने को हैं और वैज्ञानिकों की मानें तो वह अब तक के सबसे विशाल परीक्षण के जरिए ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य का पता लगाने की कोशिश करेंगे। टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में टीवी चैनल वाले बेतुकी और बेकार आशंकाओं को बता कर लोगों को गुमराह कर रहे है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक महाविस्फोट से हुई थी और वैज्ञानिक 27 किलोमीटर लंबी इस मशीन से विस्फोट कर एक बार फिर वैसी ही परिस्थितियां पैदा करेंगे, ताकि दुनिया के निर्माण के रहस्य का पता लगाया जा सके। प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक किसी भी ऐसी आशंकाओं को निराधार बता रहे हैं, जो अफवाहें उड़ाई जा रहीं है। प्रयोग से जुड़े भारतीय वैज्ञानिक वाईपी वियोगी का कहना है कि एलएचसी से धरती के नष्ट होने का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि यदि ऐसा कोई खतरा होता तो वैज्ञानिक यह प्रयोग करने का जोखिम नहीं उठाते।उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड की उम्र लगभग 14 अरब वर्ष और धरती की उत्पत्ति की उम्र करीब साढ़े चार अरब वर्ष मानी जाती है। तब से लेकर अब तक ब्रह्मांड में न जाने कितनी टक्कर हुई हैं। लेकिन धरती के अस्तित्व पर कभी कोई संकट नहीं आया।एलएचसी से परखनली में छोटे कणों में ऊर्जा पैदा की जाएगी। इससे प्रोटोन एक दूसरे से टकराएंगे। इस दौरान ऊर्जा का स्तर सात गुना ज्यादा होगा। यह अब तक का सबसे ज्यादा हासिल किया जाने वाला स्तर होगा। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस परीक्षण के जरिए भौतिक विज्ञान के कुछ बड़े सवालों के जवाब ढूं़ढे़ जा सकेंगे, जैसे- ब्रह्मांड जैसा दिखाई देता है, वैसा क्यों है और द्रव्य गुरुत्वाकर्षण तथा रहस्यमयी डार्क मैटर को कैसे स्पष्ट किया जा सकता है आदि। इस परीक्षण के पीछे डाक्टर लिन इवांस हैं, जो एक खनिक के पुत्र हैं। उनका कहना है कि विज्ञान के प्रति वे तब आकर्षित हुए जब वह कम उम्र के ही थे। एक अन्य वैज्ञानिक मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ब्रायन कोक्स हैं।

Wednesday, August 27, 2008

राउरकेला का हनुमान वाटिका





पिछले दिनों एक पारिवारिक कार्यक्रम के सिलसिले में मेरा उड़ीसा के एक औद्योगिक शहर राउरकेला में जाना हुआ। नई दिल्ली से दो दिनों की थकान भरी यात्रा से होता हुआ जब मैं इस औद्योगिक नगरी राउरकेला में प्रवेश किया तो शाम हो चुकी थी। शहर में प्रवेश करते ही मुझे भगवान हनुमान की एक बहुत बड़ी प्रतिमा नजर आई। प्रतिमा इतनी विशाल थी कि मेरी नजर ही नहीं हट रही थी। जानने की उत्सुकता हुई, तो पता चला इसकी ऊंचाई 74 फुट 9 इंच है, और यह प्रतिमा एशिया में सबसे ऊंची है।अगले दिन मैं अपने मित्रों के साथ इस मंदिर के दर्शन और इसके बारे में जानने के लिए चल पड़ा। इस मंदिर जिसका नाम हनुमान वाटिका है, राउरकेला शहर का एक महत्वपूर्ण स्थल है। शनिवार और रविवार के अलावा विशेष दिनों में यहां भगवान हनुमान की पूजा के लिए सीमावर्ती झारखंड, बिहार और सुदूर छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु आते हैं।यह हनुमान वाटिका 12 एकड़ के क्षेत्र में फैली है। इसमें भगवान शिव, जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, वैष्णो देवी, सोमनाथ, मां मंगला, मां विमला और भगवान श्रीराम के छोटे मंदिर भी हैं।अभी हाल फिलहाल इस परिसर में सांई राम का भी एक मंदिर बनाया गया है। इस बेमिसाल प्रतिमा के शिल्पकार आंधप्रदेश के जाने माने कलाकार टोगु लक्ष्मण स्वामी हैं जिन्हें इसे बनाने में दो वर्ष लगे।बताते है कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री बिजू पटनायक ने 23 फरवरी 1994 को इस प्रतिमा का अनावरण किया था तो प्रतिमा पर माला पहनाने के लिए उन्हें क्रेन के जरिए ऊपर ले जाया गया था। कुल मिला कर इस शहर के लिए यह मंदिर एक एतिहासिक धरोहर है, जिसे संभालना बहुत जरूरी है।

Sunday, August 17, 2008

शिखंडी सरकार के मुंह पर तमाचा?


शुक्रवार को जहां सारा देश स्वतंत्रता दिवस की 62वीं सालगिरह मना रहा था, वहीं कश्मीर घाटी में केंद्र सरकार के मुंह पर कालिख पोतते हुए अलगाववादियों ने पाकिस्तानी झंडे फहराए। केंद्र की मनमोहन सरकार ने इस मामले पर जिस तरह से शिखंडी रवैये का परिचय दिया है, इससे करोड़ों हिंदुस्तानियों का सिर शर्म से झुक गया है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जिस ऐतिहासिक लाल चौक पर 60 साल पहले बड़ी शान से तिरंगा फहराया था, शुक्रवार को वहीं पर अलगाववादियों ने भारत सरकार को तमाचा मारते हुए पाक ध्वज फहराए। यह सब कुछ उस समय हुआ जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहा था।घाटी के हर मस्जिद से शुक्रवार को भारत विरोधी नारे लगाए जाते रहे और दिल्ली के लाल किला से हमारे पीएम मिमियाते रहे। शुक्रवार को घाटी में जो कुछ भी हुआ इसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। पुलिस और अ‌र्द्धसैनिक बल शांत होकर राष्ट्रविरोधी तत्वों का तमाशा देख रहे थे।जुमे की नमाज के बाद तो अलगाववादियों ने जुलूस निकाल कर जम कर हिंदुस्तान को कोसा। इन नमकहरामों ने 'हम क्या चाहते-आजादी, यहां क्या चलेगा-निजाम-ए-मुस्तफा, भारत के आईवानो को-आग लगा दो, पाकिस्तान से नाता क्या-लाइल्लाह लिलल्लाह, जीवे-जीवे पाकिस्तान' के नारे भी लगाए गए। लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। विडंबना यह है कि देश के अन्य राज्यों में अगर ऐसी कोई घटना सामने आती है तो उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दायर हो जाता है। सवाल यह उठता है कि यहां सरकार की यह दोगली नीति कब तक चलेगी। कश्मीर घाटी में हाल ही में अलगाववादी नेताओं ने नियंत्रण रेखा पार करने की कोशिश की लेकिन उनके खिलाफ कोई मामला क्यों नहीं दर्ज हुआ। आखिर यह देश कब तक राजनेताओं के दोगलेपन का खामियाजा भुगतता रहेगा? आखिर कब तक?

Saturday, July 26, 2008

सेक्स बनाम संचार क्रांति भाग-1


पहले मै आपको एक किस्सा सुनाता हूं। आज से करीब पंद्रह साल पुरानी बात है। टीवी पर उन दिनों परिवार नियोजन का एक विज्ञापन आता था। तब हमारे यहां पूरे परिवार के साथ टीवी देखने का चलन था। जैसे ही वह विज्ञापन आने को होता, मेरे दादा जी मुझे पानी लाने के बहाने कमरे से बाहर भेज देते। मुझे ताज्जुब होता कि दादा जी को रोज एक निश्चित समय पर ही प्यास क्यों लगती है। बाद में मुझे अपने दोस्तों से पता चला कि उस समय परिवार नियोजन का विज्ञापन आता था। लेकिन अब यह बीती बात हो गई है। अब तो दादा जी खुद विज्ञापन में बच्चों को समझाते नजर आ सकते हैं कि एड्स से बचाव के लिए सुरक्षित सेक्स कितना जरूरी है। फिल्म खुद्दार में करिश्मा कपूर पर 'सेक्सी, सेक्सी, सेक्सी मुझे लोग बोले' गाना फिल्माया गया तो हंगामा मच गया। गाने पर बैन लगा और 'सेक्सी-सेक्सी' की जगह 'बेबी-बेबी' करना पड़ा। डेढ़ दशक में ऐसा बदलाव आ गया कि अमिताभ की चीनी कम में आठ साल की एक बेबी का नाम 'सेक्सी' है। पर यह सिर्फ फिल्मों की बात नहीं है, संचार क्रांति के साथ-साथ पूरे समाज में सेक्स क्रांति आ चुकी है। सेक्स की खुले आम चर्चा कभी वर्जित रही होगी लेकिन आज सेक्स शायद हमारी दैनिक बातचीत का हिस्सा बन गया है। वह जमाना और रहा होगा, जब लोग डॉक्टर से भी सेक्स के बारे में संकोच के साथ बात करते थे। आज सब कुछ खुला और साफ है।

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ पी के जायसवाल से एसएमएस द्वारा ऑनलाइन प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल को पढ़कर आप समझ सकते हैं कि सेक्स चर्चा अब कितनी ओपेन है। सवाल अंग्रेजी में था, मै यहां उसका शालीन भावार्थ दे रहा हूं-मैं 24 वर्षीय युवती हूं। मैं जानना चाहती हूं कि सेक्स क्षमता बढ़ाने के लिए क्या कोई दवा है? मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने सब-कुछ आजमाकर देख लिया। मैं आपसे मदद चाहती हूं कि आप मुझे कुछ अच्छी टैबलेट्स बता दीजिए जिससे ।। धन्यवाद। पंद्रह साल पहले पोते को पानी लाने भेजकर परिवार नियोजन का विज्ञापन न देखने देने वाले दादा जी अब इस पोते या पोती का क्या करेंगे?

एक के साथ एक फ्री की तरह संचार क्रांति के साथ-साथ सेक्स क्रांति भी भारत को उपहार में मिली है। जो लड़के -लड़कियां आपस में सेक्स की चर्चा करने में संकोच करते थे वे बिना हिचक नॉनवेज जोक्स एसएमएस करने लगे। रही सही कसर इंटरनेट ने पूरी कर दी। एसएमएस में तो थोड़ा संकोच भी रहता है, क्योंकि उससे आपकी पहचान जुड़ी होती है, लेकिन इंटरनेट पर आप पहचान छुपाकर आसानी से सेक्सी चैट कर सकते हैं। यहां न कोई पहचान है न कोई बंधन, इसलिए बातें भी खुल्लमखुल्ला होती हैं। पर जरूरी नहीं कि वहां जो जवाब दिए जा रहे हैं वे सही ही हैं। कई बार तो लड़के -लड़की बनकर और लड़कियां लड़का बनकर चैट करती हैं। पर ये फैंटेसी की दुनिया है और इसका निर्मल आनंद लेने वाले इस चक्कर में नहीं पड़ते कि जिसे वे लड़की समझ के बात कर रहे हैं, वह भी उन्हीं की तरह कोई लड़का है। वैसे इस दुविधा से मुक्त करने की सुविधा भी बाजार ने उपलब्ध करा दी है। रसीली बातें, मजेदार बातें शीर्षक से टेलीफ्रेंडशिप के तमाम विज्ञापन छपते हैं, जिनमें दिए गए नंबर पर डायल करके आप अपना मन और जेब दोनों हलके कर सकते हैं। अब जमाना विजुअल का है इसलिए सिर्फ आडियो से काम नहीं चल सकता, बाजार इस बात को अच्छी तरह जानता है। ब्लू फिल्मों का ट्रेंड तो काफी पहले से है। लेकिन ब्लू सीडी खरीदने के लिए आपको वीडियो पार्लर तक जाना होता था। इसमें भी संकोच होता था। संकोच सेक्स बाजार का सबसे बड़ा दुश्मन है, लिहाजा यह हर तरह का संकोच मिटा देना चाहता है। आपके छोटे से संकोच के खिलाफ अनगिनत पोर्न साइट्स हाजिर हैं। आप अपना कंप्यूटर ऑन कीजिए, सेक्सी-दुनिया आपका मनोरंजन करने को हाजिर है।

पर, जिस संस्कृति में पति-पत्नी अपने शयनकक्ष में भी दिया बुझाकर ही प्रेम करते थे, उसने क्या यूं ही सेक्स-बाजार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया? प्रतिरोध हुआ है पर बदलाव की लहर इतनी तेज थी कि तटबंध भी साथ में बह गए। ऊपर में जो मैने दादा जी वाला किस्सा बताया है, भारत में सेक्स-बूम की शुरूआत भी उसी दौर से होती है। जिस कपूर परिवार में लड़कियों को फिल्मों में काम करने की छूट नहीं थी, उसी की एक बेटी करिश्मा कपूर ने जब खुद्दार फिल्म में 'सेक्सी-सेक्सी मुझे लोग बोलें' गाया तो हड़कंप मच गया। गाने को बैन कर दिया गया तो इसे 'बेबी-बेबी मुझे लोग बोलें' करके रिलीज किया गया। हालांकि अभी भी सेक्सी-सेक्सी वाला वर्जन सुनने को मिलता रहता है। करिश्मा ने तो खुद को ही सेक्सी कहा था, लेकिन गो¨वदा तो उनसे भी दो कदम आगे बढ़कर अपनी पैंट और शर्ट को भी सेक्सी बताने लगे। इसके बाद सेक्स की जो आंधी चली उसमें प्रतिरोध के दरख्त उखड़ गए। चौदह साल पहले 'सेक्सी' को 'बेबी' बनना पड़ा था, आज बेबी को सेक्सी बना दिया गया। अमिताभ बच्चन की फिल्म चीनी कम में सात-आठ साल की एक बच्ची स्वीनी खैरा का नाम 'सेक्सी' रखा गया है। सेक्सी होना अब एक खिताब है। हाल ही में बिपाशा बसु को एशिया की सबसे सेक्सी महिला और शाहरुख को सबसे सेक्सी पुरुष का दर्जा मिला तो इनके भाव बढ़ गए। क्रमश:.....

Friday, March 7, 2008

बिहारी होने की इतनी बड़ी सजा


क्या किसी को बिहारी होने की इतनी बड़ी सजा दी जा सकती है..की उसके दोनों हाथ कट डाले जाय..आखिर राज ठाकरे के गुंडों को किसने ये हक़ दे दिया की वो किसी गरीब, बेबस और मजबूर को सिर्फ़ इस लिया सजा दे की वो बिहारी या भइया है..कहा है इस देश का कानून, बड़ी-बड़ी बात करने वाले ब्रस्त नेता...शायद सबकी आत्मा मर चुकी है...आइए जानते है उस बेबस, लाचार की दास्ताँ....

मैं रोज की तरह भुजा बेच कर रात को करीब 10 बजे फुटपाथ पर ही सोने चला गया। अभी मेरी आंख लगी ही थी कि मनसे के सैकड़ों कार्यकर्ता मुझे घेर कर पिटने लगे, मैं उनके पैरों पर गिर कर गिड़गिड़ाने लगा, बावजूद मेरी लात-घूसों से पिटाई होती रही और मैं बेहोश हो गया। दूसरे दिन जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को अस्पताल में पाया। मेरे दोनों हाथ मनसे कार्यकर्ताओं ने काट लिए थे और मेरे हाथों पर पट्टियां बंधी थीं। यह दर्दनाक दास्तां उस गरीब किशुन का है, जिसे बिहारी होने की इतनी बड़ी सजा दी गई है। पिछले दिनों राज ठाकरे व उसके समर्थकों द्वारा उत्तर भारतीयों पर बरपाए गए कहर का शिकार हुआ किशुन। मनसे कार्यकर्ताओं ने निर्ममतापूर्वक उसके दोनों हाथ काट कर दरिंदगी का परिचय दिया है। बिहार के सिवान जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के दुदही गांव निवासी किशुन सिंह की गलती सिर्फ इतनी है कि वह पिछले 10 वर्र्षो से अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए महाराष्ट्र के पुणे में भुजा बेचता था। दिनभर भुजा बेच कर रात में फुटपाथ पर ही सो कर जिंदगी गुजारने वाले किशुन को क्या पता था कि उसे इसकी कीमत अपने दोनों हाथ गवां कर चुकानी पड़ेगी। घर लौटे किशुन के चेहरे पर मनसे कार्यकर्ताओं का खौफ इस कदर गहरा गया है कि आज भी वह किसी अंजान व्यक्ति को देख कर कांप जाता है।

सिवान के सदर अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा किशुन को इस बात की चिंता सता रही है कि वह अपनी 12 वर्षीय बिटिया रंजीता का हाथ कैसे पीला करेगा। साथ ही उस आठ वर्षीय पुत्र और उसकी पत्‍‌नी का क्या होगा। इस परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा।