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Saturday, November 29, 2008

शर्म करो पाटिल आर.आर. पाटिल


महाराष्ट्र का शिखंडी उप मुख्यमंत्री आर आर पाटिल देश के सबसे बड़े आतंकी हमले को छोटी-मोटी वारदात मानता है। इस बे-शर्म मंत्री को कौन बताए कि तुम जैसे नेता ही देश के लिए सबसे बड़े आतंकी है। शनिवार को मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इस हिजड़े नेता ने कहा कि 'बड़े शहरों में ऐसे एकाध हादसे होते रहते हैं।' आतंकी बड़े पैमाने पर तबाही मचाने आए थे, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। इस तरह का बयान देकर आर।आर। पाटिल जैसे हिजड़े नेता इस हमले में शहीद जवानों समेत उन तमाम नागरिकों का अपमान किया है, जो इस हमले में अपने प्राणों की आहुति दे गए। यह इस देश का दुर्भाग्य है कि एक हिजड़ा पाटिल केंद्र में कुंडली मार कर बैठा है तो दूसरा हिजड़ा पाटिल मुंबई में। क्या अब मनमोहन सिंह को राष्ट्रीय शर्म दिखाई नहीं देता?

शत शत नमन..जाबांज शहीदों








देश पर हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमले में हमने १६ जांबाज अधिकारियों को खोया हैं। आतंकवाद के खिलाफ करीब साठ घंटे चली इस कार्रवाई में एटीएस चीफ हेमंत करकरे के अलावा अशोक काम्टे, विजय सलास्कर, शशांक शिंदे, प्रकाश मोरे, बापूसाहेब दुरुगडे़, तुकाराम ओंबले, नाना साहेब भोंसले, अरुण चिते, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, एम।सी.चौधरी और अंबादास पवार जैसे सिपाही भी वीर गति को प्राप्त हुए। इन जांबाजों के बलिदान को देश कभी भुला नहीं पाएगा।

सभी बीर शहीदों को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि

..कहां है वे हिजड़े नेता


..कहां है वे हिजड़े नेता, जिन्होंने केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के बावजूद कुछ ही समय पूर्व सिमी को निर्दोष बताया था। देश में इस समय एक भीषण आतंकी हमला हुआ है, और वे शिखंडी (नेता) इस वक्त किसी को ढाढ़स बंधाने के लिए भी आगे नहीं आए। शर्म करो अमर सिंह, लालू, पासवान, राज ठाकरे, अबू आजमी और महा बेशर्म गृहमंत्री समेत केंद्र सरकार भी। खैर जब ये बेशर्म ही हैं तो इनके बारे में क्या कहना। सरकारी लापरवाही से देश की आर्थिक राजधानी पर हुए इस बड़े आतंकी हमले में हम मुंबई के जज्बे को सलाम करते है। साथ ही देश के घटिया राजनेताओं की गंदी राजनीति की भेंट चढ़े उन तमाम लोगों, एटीएस के अधिकारियों और कमांडो जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते है, इस उम्मीद के साथ शायद उन हिजड़े राजनेताओं को अब सद्बुद्धि आ जाए जो आतंकवादियों में भी वोट बैंक तलाशते रहते है।

Friday, November 28, 2008

गोलियों की बौछार में वो अपनी प्रेमिका को निकाल लाया


आतंकवादी ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर रहे थे, बीच-बीच में ग्रेनेड की आवाज भी दिल को दहला दे रही थी, मगर इन सबके बीच एक शख्स ऐसा था, जिसे कुछ नहींसूझ रहा था। उसे सिर्फ दिखाई दे रहा था, वो चेहरा जो थी उसकी मासूम प्रेमिका। आपने फिल्मों मे हीरोइन की विलेन से हिफाजत करने के लिए लड़ते हीरो को कई बार देखा होगा। लेकिन बृहस्पतिवार को मुंबई मे एक शख्स ने सचमुच मे 'हीरो' जैसा काम करके दिखाया। आतंकियों की गोलियों की बरसात के बीच से अपनी प्रेमिका को निकाल लाया। हालांकि इस दौरान एक गोली उसकी प्रेमिका के पैर मे लग गई। आस्ट्रेलिया का रहने वाला यह युवा जोड़ा ख्ब् साल की केट एंस्टी और ख्फ् साल के डेविड काकर बुधवार को मुंबई पहुंचे थे। दोनों यहां ग्रेजुएट की डिग्री मिलने की खुशी मनाने आए थे। उन्हें क्या पता था कि उनकी खुशियों पर आतंक का ग्रहण लग जाएगा। बुधवार को होटल पहुंचने के थोड़ी देर बाद यह जोड़ा लियोपोल्ड कैफे पहुंचा। दोनों अभी अपनी सीट पर बैठे ही थे कि चार-पांच लोग आए और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। एक गोली केट के पैर मे लगी और उसकी हड्डियों को छेदती हुई बाहर निकल गई। चारों ओर से गोलियों की आवाज। चीख-पुकार और अफरा-तफरी। लेकिन दाद देनी होगी डेविड के दिमाग की। उसने पल भर की देरी किए बिना केट को गोद मे उठाया और दौड़ पड़ा। बिना यह सोचे कि अगले पल क्या होने वाला है। इस दौरान एक गोली उसके बदन को भी छूती हुई निकल गई। लेकिन डेविड रुका नही। वहां से बाहर निकल कर वह टैक्सी लेकर अस्पताल पहुंचा। वहां उसकी प्रेमिका केट के पैर मे सर्जरी की गई है। वाकई क्या जज्बा है-दोनों के प्रेम में।

Thursday, November 27, 2008

सलाम सतेंद्र दूबे...सलाम सतेंद्र दूबे


वह बहुत ही होशियार, ईमानदार और हमेशा दूसरों की फिक्र करने वाला इंसान था। एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट का प्रबंधक इंजीनियर होते हुए भी सामान्य जीवन के साथ 18-18 घंटे काम करना और धूल-धक्कड़ की परवाह किए बिना सुदूर इलाकों में पैदल ही चले जाना उसकी दिनचर्या थी। मगर उसे क्या पता था कि उसकी ईमानदारी ही उसके लिए एक दिन मौत का कारण बन जाएगी। जी, हां हम बात कर रहे है एनएचएआई के शहीद इंजीनियर सतेंद्र दूबे की, जिन्हें २७ नवंबर २००३ में मौत के घाट उतार दिया गया। उन्हें सजा मिली भ्रष्टाचार को उजागर करने की, उसे रोकने की और सिस्टम से लड़ने की। दुर्भाग्य तो इस बात का है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के ड्रीम प्रोजेक्ट और उनके कार्यालय से जुड़े इस मामले की जांच कर रही सीबीआई भी कठघरे में है। सतेंद्र दूबे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की गया यूनिट के प्रमुख थे और हत्या से लगभग म् माह पूर्व उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे, मगर आज हत्या के 5 साल बाद भी नतीजा सिफर रहा। इस मामले में अब तक आधा दर्जन लोग गिरफ्तार किए गए, जिसमें प्रमुख आरोपी मुकद्दर पासवान और शिवनाथ साव ने विगत 1 फरवरी २००४ को संदिग्ध रूप से आत्महत्या कर ली, हालांकि उसके घर वालों ने सीबीआई पर उन्हें जहर देकर मारने का आरोप लगाया। वहीं २३ जून २००८ को एक और मुख्य आरोपी उदय चौधरी पुलिस हिरासत से फरार हो गया। बताया गया कि पटना सिविल कोर्ट में पेशी के दौरान वह अचानक गंगा नदी पुल से छलांग लगा कर नदी में कूद गया। बाकी आरोपी भी सबूत के अभाव में छोड़ दिए गए। इस मामले का एक और प्रमुख गवाह एक रिक्शाचालक भी पिछले 5 सालों से गायब है, जिसके बारे में सीबीआई आज तक कोई सुराग नहीं लगा पाई। यानी कुल मिला कर विगत पांच वर्षों में देश की एक महत्वपूर्ण जांच एजेंसी एक ईमानदार इंजीनियर के हत्यारों को सजा भी नहीं दिला सकी।

Thursday, November 20, 2008

मुंबई एटीएस ने साध्वी से पूछा- क्या तुम कुंवारी हो?


आतंकवादी बताकर गिरफ्तार की गई साध्वी प्रज्ञा को यातना देने में एटीएस ने तमाम हदें पार कर दी है। साध्वी से पूछे गए सवालों में इंसानियत और मर्यादाओं को तार तार करने वाले सवाल भी पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या वे कुंवारी हैं ? आश्चर्य इस बात का है कि अर्ध्दनग्न नृत्य करने वाली टीवी और फिल्मी अभिनेत्रियों के आपसी झगड़ों और स्वार्थों की लड़ाई में देश का महिला आयोग बयान जारी करता है और इन अभिनेत्रियों से मिलकर उनके साथ ग्रुप फोटो खिंचवाता है, जबकि एक साध्वी जिससे अभी पूछताछ हो ही रही है उसे हर तरह से प्रताड़ित किए जाने के बावजूद महिला आयोग ने चुप्पी साध रखी है।

कश्मीर में आशिया अंदरावी नामकी महिला कट्टर इस्लामी संगठन दुख्तराने मिल्लत की अध्यक्ष हैं। उन पर अमेरिका ने आरोप लगाया था कि श्रीनगर के एक बम धमाके में उनके संगठन का हाथ था। जिसमें एक पत्रकार मारा गया था। भारतीय गुप्तचर एजेंसियों ने उन पर हवाला से पैसा लेकर जिहादी आतंकवादियों को देने का आरोप लगाया और पोटा के अंतर्गत जेल भी भेजा देश के खिलाफ और आतंकवादियों के समर्थन में काम करने वाली इस महिला को जेल में वे तमाम ऐसो आराम और सुविधाएं दी गईं और बाद में छोड़ भी दिया गया। दूसरी ओर साध्वी प्रज्ञा पर अभी तक कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। लेकिन उससे पूछताछ के नाम पर नैतिकता, कानून और बेशर्मी की तमाम हदें पार की जा रही है। आखिर महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास को यह सब दिखाई क्यों नहीं देता, या वे भी पूर्वाग्रह से ग्रसित है।

Wednesday, November 12, 2008

महेन्द्र सिंह धोनी, पिस्टल और चरित्र प्रमाण पत्र


क्रिकेट में अपनी करिश्माई कप्तानी से भारत के तिरंगे को लहराने वाले महेन्द्र सिंह धोनी के लिए आज चरित्र प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ गई? जबकि इस देश के सफेदपोशों, आपराधिक चरित्र के मंत्रियों को बंदूक, राइफल, पिस्टल का लाइसेंस बेधड़क मिल रहा है, फिर देश के सपूत महेन्द्र सिंह धोनी के पिस्टल लाइसेंस में पचास अड़ंगे क्यों?
माना कि कानून सबके लिए बराबर होता है। धोनी ने भी सभी प्रक्रियाओं का पालन किया, पर उसे निपटाने में प्रशासन इतने नौटंकी क्यों कर रहा है? जबकि नेता-मंत्री-अधिकारी के आवेदनों पर पूरा महकमा कुत्ते की तरह दौड़ता रहता है।
जहां तक प्रक्रिया की बात है तो एक ही राज्य में अलग-अलग कानून चल रहे। रांची में कमिश्नर ने लाइसेंस के लिए स्पेशल ब्रांच और सीआईडी रिपोर्ट जरूरी कर दी है। जबकि दूसरी जगहों पर ऐसा नहीं है। वैसे भी कमिश्नर को यह अधिकार है कि वह जिसके चरित्र से संतुष्ट हों, उन्हें हथियार का लाइसेंस निर्गत कर सकते हैं। अब धोनी के चरित्र को तो बताने की जरूरत नहीं। पर, नेता-मंत्रियों के जो लाइसेंस जारी हुए, वह भी एक नहीं तीन-तीन कैसे? कई नेता और मंत्री ऐसे हैं, जिनके खिलाफ थानों में आपराधिक मामले दर्ज है। कुछ मंत्री के खिलाफ तो चार्ज शीट तक कोर्ट में दाखिल किये गये हैं, फिर उन्हें हथियारों के लाइसेंस कैसे दिए गए।

एक नजर हमारे माननीय मंत्रियों के चरित्र पर।

शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की- एक रायफल, एक बंदूक, एक पिस्टल (दो आपराधिक मामले दर्ज)
ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का- एक बंदूक, एक रायफल(दो आपराधिक मामले दर्ज), सिमडेगा से जारी हथियार अलग
पूर्व मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी : एक रायफल, एक पिस्टल
पूर्व गृह मंत्री सुदेश महतो: एक रायफल, एक पिस्टल
मंत्री कमलेश सिंह : एक रिवाल्वर, एक रायफल(एक आपराधिक मामला दर्ज)
पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी: एक बंदूक
जेएमएम नेता पंकज सिंह: एक रिवाल्वर, एक बंदूक(एक मामला)
झामुमो नेता नवीन चंचल : एक रिवाल्वर(एक मामला)
रामचंद्र चंद्रवंशी : एक बंदूक, एक रिवाल्वर, एक रायफल (दो मामले दर्ज)
थियोडर किड़ो : एक बंदूक
बसंत कुमार लोंगा : एक बंदूक(एक मामला)
झामुमो नेता शिवलाल महतो : एक रिवाल्वर
कांग्रेस नेता कुमार महेश सिंह : एक रिवाल्वर
योगेन्द्र साव : एक रिवाल्वर
विधायक प्रकाश राम: एक रायफल एवं बंदूक (एक मामला),
विधायक रामचंद्र सिंह : एक रिवाल्वर(एक मामला)
एमएलए जर्नादन पासवान: एक रायफल, एक बंदूक(दो मामले)
एमएलए सत्यानंद भोक्ता: एक बंदूक(एक मामला)
इनके चरित्र का क्या होगा? झारखंड प्रशासन बताएगा कि इनका चरित्र-प्रमाण किस उल्लू ने देखा?

Wednesday, November 5, 2008

मनसे की गुण्डागर्दी जारी, फिर मारा गया यूपी का एक भइया


पहले बेरहमी से पीटा, फिर उसके गले में रस्सी बांधकर खोली तक खींच कर ले गए, और फिर अधमरा कर मनसे के गुण्डे भइयों के नाम पर थूक कर चलते बने॥

धर्मदेव की हत्या का मामला अभी ठण्डा भी नहीं हुआ था कि मुम्बई में राज ठाकरे के गुण्डों ने एक और उत्तर भारतीय युवक राकेश की मंगलवार की रात पीट-पीट कर हत्या कर दी। मृतक युवक यूपी के संतकबीर नगर के दुधारा थाना क्षेत्र के ग्राम सियाकटाई का रहने वाला था। राकेश मुंबई के जिला रत्‍‌नागिरि के थाना व मोहल्ला चैपलून में रहकर लकड़ी के आरामशीन पर एक वर्ष से काम करता था।महाराष्ट्र में सरकारी संरक्षण में हो रही मनसे की गुण्डागर्दी थमने का नाम नहीं ले रहीं है। मंगलवार की रात काम से खोली लौट रहे राकेश को मनसे के गुण्डों ने जमकर पीटा और फिर उसके गले में रस्सी बांधकर खोली तक खींच कर छोड़ आये थे। सुबह पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उसकी लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और मुंबई में रह रहे उसके भाई को सूचना दी। राकेश के माता-पिता का कुछ दिनों पूर्व देहांत हो गया था। वर्तमान में उसका एक भाई महेश कुमार चौरसिया मुंबई में ही रहता है। अब तो इस तरह की घटनाएं महाराष्ट्र में आम होती जा रहीं है। मनसे के नंगे नाच पर महाराष्ट्र की नपुंसक सरकार और दिल्ली में बैठे उसके नपुंसक संरक्षक धृतराष्ट्र की तरह आखें बंद कर तमाशा देश कहे है, वहीं बिहार और यूपी के नेता और मंत्री गण अपनी-अपनी राजनीति करने में मगन है। अब तो जनता को ही कुछ करना होगा और इन नपुंसकों के लिए हथियार उठाना पड़ेगा? तभी शायद गोली का जवाब गोली और हत्या के बदले हत्या का मतलब समझ में आएगा।